जनता की समस्याओं से विमुख होते देश की सरकार और मीडिया !
जनता की समस्याओं से विमुख होते देश की सरकार और मीडिया !
◆ निष्पक्ष पत्रकारिता का दम भरने वाले ज्यादातर अखबार और न्यूज चैनल के पत्रकार सरकार के बन गए कठपुतली◆ अन्नदाताओं के बिगड़ते हालात, बढ़ती बेरोजगारी,
भुखमरी,गरीबी, महंगाई, कोरोना के बढ़ते संक्रमण और प्राकृतिक आपदा से पीड़ित परिवारों सहित देश सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे को भूल, मुंबई के मुद्दे पर उलझ कर रह गई पत्रकारिता।
◆ "पत्रकार" की अंतरात्मा, कलम और मुखर आवाज देश के हित में हो,जनता के हित में हो, निष्पक्ष हो और जहां तक हो सके जनपक्ष हो। पत्रकारिता का यही मूलमंत्र है।
सरकार और मीडिया के खिलाफ त्वरित टिप्पणी
◆ डायमंड शुक्ला प्रधान संपादक , मिशन क्रांति न्यूज
◆ "पत्रकार" की अंतरात्मा, कलम और मुखर आवाज देश के हित में हो,जनता के हित में हो, निष्पक्ष हो और जहां तक हो सके जनपक्ष हो। पत्रकारिता का यही मूलमंत्र है।
सरकार और मीडिया के खिलाफ त्वरित टिप्पणी
◆ डायमंड शुक्ला प्रधान संपादक , मिशन क्रांति न्यूज
मिशन क्रांति न्यूज। देश की जनता के प्रति सरकार का रवैया कतई उचित नहीं लग रहा है। जनमानस की मूलभूत समस्याओं को भूलकर सरकार चंद योजनाओं में सिमट कर रह गई है। जिसका खामियाजा देश की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। वहीं मीडिया खासकर ज्यादातर न्यूज चैनल अन्नदाताओं के बिगड़ते हालात, बढ़ती बेरोजगारी, भुखमरी,गरीबी, महंगाई, कोरोना के बढ़ते संक्रमण और प्राकृतिक आपदा से पीड़ित परिवारों की मूल समस्याओं को भूलकर मुंबई के मुद्दे पर उलझ गई हो।
मैं खुद एक "पत्रकार" हूं पर देश के चौथे स्तंभ का दंभ भरने वाले,,,आज मैं पूछना चाहता हूं आपसे क्या यही भारत के पत्रकार हैं ? क्या यही पत्रकारिता है...?
निष्पक्ष ना सही अगर जनपक्ष भी होते तो यह सवाल जेहन में नही उठता। पत्रकारिता तो सरकारी तंत्र को जगाने,उनके कार्यप्रणालियों में योजनाओं में हुई चूक को उजागर कर उसमें सुधार कलने पर बल देश ते हैं...एक प्रकार से कहें तो पत्रकार, मीडिया का दायित्व बिना द्वेष के निष्पक्ष समाचार का प्रकाशन और प्रसारण करना होता है लेकिन किसी के सियासी जंग में एकतरफा किसी बात को रखना और उसी मुद्दे पर लंबे समय तक अटके रहना पत्रकारिता नही चाटूकारिता है। पत्रकार वही है जो किसी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा ना हो। एक पत्रकार की अंतरात्मा और कलम और मुखर आवाज देश के हित में हो,जनता के हित में हो, निष्पक्ष हो और जहां तक हो सके जनपक्ष हो। पत्रकारिता का यही मूलमंत्र है। न्यूज चैनल में राष्ट्रीयता, देश रक्षा और संस्कृति और सभ्यताओं को भूल चूके महज पार्टी विशेष सियासी जंग के मुद्दों पर बात करने वाले मीडिया और पत्रकार चौथा स्तंभ कहे जाने वाले उनकी साख को ही कमजोर करने में लगे हैं और भारतीय प्रेस परिषद मौन है। कारण यही है कि खुद के न्यूज चैनल की टीआरपी बढ़ाने,सरकार के करीबी बनकर पत्रकारिता की साख को मजबूत करने की बजाय अपनी साख मजबूत करने मे लगे हैं लानत है ऐसी पत्रकारिता पर,लानत है ऐसे न्यूज चैनल पर और लानत है ऐसी सरकार पर जो अखबारों में न्यूज चैनलों में सिर्फ अपनी वाहवाही पसंद करते हैं। पिछले एक डेढ़ महिने से महज एक ही मुद्दे पर न्यूज चैनल में जितने डिबेट, और लाईव टेलीकास्ट देखने को मिल रहा यदि यही डिबेट सरकारी तंत्र के जिम्मेदार नुमाइंदों को बुलाकर अन्नदाताओं के बिगड़ते हालात पर किए जाते,गरीबी,भूखमरी, बेरोजगारी,कोरोना महामारी और बाढ़ पीडि़त परिवार पर किए जाते तो मैं समझता हूं कि सरकार की तख्ता पलट जाती चाहे वह राज्य की सरकार हो या फिर केंद्र की सरकार।
हवाई सफर करने वाले, एसी के बंद कमरे में बैठकर योजनाएं लागू कर देने से कुछ नही होता उसका क्रियान्वयन भी सही ढंग से हो। तब जनता को योजनाएं समझ मे आती भी है और जनता को इसका लाभ भी मिलता है। सरकारी तंत्र फेल है। कभी देश की सुरक्षा के नाम पर जनता को भटका रहे हैं तो कभी राम मंदिर की बात कर धर्म के नाम पर धर्मनिरपेक्ष देश के लोगों को बांटने की साजिश हो रही है। पर पत्रकार मौन है। पत्रकारिता नही चाटूकारिता कर रहे हैं। जिससे सरकार के असली चेहरा से लोग अनजान हैं अनभिज्ञ हैं। जागो अन्नदाता किसान, जागो बेरोजगार युवा साथियों सरकार से अपना अधिकार मांगने अपनी आवाज मुखर करने में लेटलतीफी मत करो। पत्रकारिता को शर्मशार करने वाले चाटूकारों से बचकर अपनी आवाज आवाम के साथ संगठित होकर मुखर करें। भारत देश का चौथा स्तंभ की साख को कमजोर करने वाले चाटूकारों जरा भी शर्म है तो निष्पक्ष पत्रकारिता कर जनता के ज्वलंत मुद्दों पर फोकस कर अपनी कलम की पैनी धार से और मीडिया के न्यूज चैनलों में अपनी मुखर आवाज से देश के लोकतंत्र की चौथे स्तंभ की रक्षा करें।
।।जय हिन्द।।
।।जय हिन्द।।


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