मेरी त्वरित,,,स्वरचित,, कविता..झूठ का "पर्दाफाश" करे तो"पत्रकारों" को "धमकाते" हो... "खबर" प्रकाशन कर दे तो,,, दुश्मन बन जाते हो....
कांकेर में "पत्रकारों" के साथ "सत्तारूढ़" पार्टी के कुछ गुंडों द्वारा मारपीट की शर्मनाक घटना और सरकार की चुप्पी पर मेरी यह त्वरित "स्वरचित" कविता सभी "पत्रकार" साथियों को सादर प्रेषित है... डायमंड शुक्ला की कविता... -------------------- झूठ का "पर्दाफाश" करे तो"पत्रकारों" को "धमकाते" हो... "खबर" प्रकाशन कर दे तो,,, दुश्मन बन जाते हो... "पत्रकार" को डराने,,,गुंडों से पिटवाते हो... भेड़िए हो तभी तो भीड़ में अपनी "ताकत" दिखाते हो... "कलमकार" हैं हम कलम से बंदूकधारियों,,, को भी डराते हैं... कानून के दायरे में रहकर गुंडों को "सबक" सिखाते हैं... शेर हैं असली "पत्रकार" सब ...जो सीधे नजरें मिलाते हैं... "नाराजगी" खबरों में दिखाते....हर दिन कितनों से टकराते हैं... लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं हम,,,सच से अवगत कराते हैं.. चुप्पी साधे हो सरकार.,,,खुद को पत्रकार हितैशी.बताते हो... भूमाफिया को संरक्षण..अफसरों से मनमानी करवाते हो... सत्ता के मद में चूर होकर क्यों अप...