उठो जवानों,उठो किसानों, अब तो हक की लड़ो लड़ाई
"युवा" हमारे देश के भविष्य हैं और "अन्नदाता" किसान
कड़ी परिश्रम कर अनाज उपजाकर सबका पेट भरता है, ये "अन्नदाता" सबके पालनहार हैं। इसके बावजूद आज सबसे अधिक शोषित शिक्षित "युवा"और "किसान" हैं जहां युवाओं को नौकरी मुहैया कराने केंद्र और राज्य की सरकार पूरी तरह सरकार विफल है। वहीं किसानों के बिगड़ते हालात को लेकर भी सरकार गंभीर नही है, ऐसे में सभी युवा "बेरोजगार" और "किसान" को एकजुट होकर "हल्ला" बोलना होगा। अपने अधिकार के लिए "हुंकार" भरना होगा। अब "जय जवान" "जय किसान" के नारों के साथ ही "जागो जवान" "जागो किसान" का नारा देना होगा ताकि "युवा बेरोजगार" और अन्नदाता "किसान" को उनका अधिकार मिल सके।
युवा "बेरोजगार" और "किसानों" को जगाने मेरी यह कविता सादर प्रेषित है...
त्वरित - स्वरचित : डायमंड शुक्ला
प्रधान संपादक, "मिशन क्रांति न्यूज"
----
युवा "बेरोजगार" और "किसानों" को जगाने "मिशन क्रांति न्यूज" की अभिनव पहल...
-----
उठो जवानो,उठो किसानो,अब तो हक की लड़ो लड़ाई...
जात -पात को भूलो यारों,,,हम किसान सब भाई - भाई...
हम किसान के पूत हैं यारों
मां धरती के सच्चे सपूत है यारों...
मेहनत करके अन्न उगाते,,,
औरों को भी हम ही खिलाते...
फिर भी किसानों के हालात वही हैं...
आजादी के पहले जो था,,,
आजादी के भी बाद वही है...
ये बात समझ नही आई....
उठो जवानो,उठो किसानो,अब तो हक की लड़ो लड़ाई...
जाति पाति को भूलो यारों,,,हम किसान सब भाई - भाई...उ
राजनीति का है बोलबाला...
जाने कितने हो रहे घोटाला...
किसानों के मुंह से लूट रहे निवाला...
"अन्नदाता" सबके रखवाला...
भाषण बाजी खूब हो रहा...
पर सरकार,, अब भी सो रहा...
नौकरशाही हाबी है...
इनकी एक बड़ी लाबी है...
देश के राजा बन बैठे और इनके हाथ में ही चाबी है...
किसानों के अधिकार पर रोक इन्हीं ने लगाई...
अब तो जागो भाई,,,मेरे अब तो जागो भाई...
उठो जवानो,उठो किसानो,अब तो हक की लड़ो लड़ाई...
जाति पाति को भूलो यारों,,,हम किसान सब भाई - भाई...
धर्म जाति पर लड़ा रहे हैं...
खूद को मसीहा (भगवान) बता रहे हैं...
मजे में सब नेता हैं यारों....
मजे में सब अभिनेता यारों...
नौकरी वालो की तो बात निराली,,,
इनके लिए हर रोज दिवाली...
व्यापारी भी मस्त हैं...यारों..
बस किसान ही त्रस्त हैं यारों...
वहीं किसानों की बात करें तो...
सिर के उपर छाज नही हैं...
तन पर कपड़े आज नही है...
"भूखमरी" दे रही है दस्तक -- 2
फिर भी कोई आवाज नही है...
फिर भी कोई "आगाज" नही है...
थाली में दाल नही है...
फिर भी तुम्हें मलाल नही हैं...
(आज गांव में अन्नदाता सबको अन्न उपजाकर खिला रहे,,
चावल,गेहूं,बाजरा,सब्जी, दाल सब किसान परिश्रम करके उपजाता है लेकिन मैं पूछता हूं किसानों से कि गांव के कितने किसानों के थाली में दाल नजर आता है...कितने किसान को दाल नसीब होता है नही होता 80 फिसदी किसानों के थाली से दाल गायब रहता है...क्या हम किसानों को रूखा सूखा खाना ही नसीब होगा और कभी मंदिर,तो कभी देश भक्ति, देश सुरक्षा ,,,आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं...अरे "आत्मनिर्भर तो सिर्फ किसान हैं" जो बारिश में भीगकर, सर्दी में ठिठुरते,धूप की गर्मी में तपकर कड़ी मेहनत करके अन्न उपजाकर सबका पेट भरता है..और किसान,ऊफ तक नही करता है...,,यही देश के पालनहार, हैं,,अन्नदाता हैं)
हे अन्नदाता,,,पालनहार...
अब तो जानो अपना अधिकार...
धरती कर रही पुकार,,,
मचा हुआ है हाहाकार...
अब तो मांगो अपना अधिकार...
जागेगी अपनी सरकार...
कब तक सहोगे गरीबी की मार...
अब तो जानो अपना अधिकार...
अलख जगाएं आओ मिलकर,,,एक मिशन है हमने चलाई...
जागो मेरे भाई,,,जागो मेरे भाई,,,
उठो जवानो,उठो किसानो,अब तो हक की लड़ो लड़ाई...
जाति पाति को भूलो यारों,,,हम किसान सब भाई - भाई...
बेरोजगारों पर ध्यान नहीं है...
पढ़ने का कोई मान नही हैं...
ये युवाओं का अपमान नही है...
सरकार ने चुप्पी साधी...
बेरोजागारी कब होगी आधी,,,
कुछ भी तो संज्ञान नही है...
सरकार को ध्यान नही है....
डिजिटल भारत की बात कर खूब लूट रहे वाहवाई...
उठो जवानो,उठो किसानो,अब तो हक की लड़ो लड़ाई...
जाति पाति को भूलो यारों,,,हम किसान सब भाई - भाई...
मिशन चला है अब तो आओ, कुछ करके हम दिखलाएं...
युवा ताकत क्या होती है,,किसान ताकत क्या होती है...
सरकार को बतलाएं...
अब देर ना करो भाई,,,अब देर ना करो भाई...
उठो जवानो,उठो किसानो,अब तो हक की लड़ो लड़ाई...
जाति पाति को भूलो यारों,,,हम किसान सब भाई - भाई...
-------
।। जय हिन्द।।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें