अन्नदाता" किसानों की गाढ़ी मेहनत की कमाई अब पूंजिपतियों और कारोपोरेट घरानों के हाथों सौंपने की साजिश !

 "अन्नदाता" किसानों की गाढ़ी मेहनत की कमाई अब पूंजिपतियों और कारोपोरेट घरानों के हाथों

सौंपने की साजिश !

◆ किसानों को विश्वास में लिए बगैर मनमाने ढंग से "तानाशाह सरकार" सदन में अवैधानिक ढंग से किसान विरोधी अध्यादेश ले आए ।

◆ किसानो की आमदनी दोगुना करने का वादा भूल गए मोदी सरकार।

● त्वरित टिप्पणी

★ डायमंड शुक्ला प्रधान संपादक,

मिशन क्रांति न्यूज.।



काश ! मोदी सरकार "अन्नदाता" किसान के पुत्र होते,,,तो किसानों की पीड़ा कुछ हद तक उनके समझ में आती भी। लेकिन चाय की चुस्कियां लेने वाला चाय का छोटा व्यापारी ...किसानों की मेहनत, उनकी समस्या, और अन्नदाता की आमदनी के बारें में कतई नहीं समझ सकता। जी हां इसका ज्वलंत उदाहरण है, किसानों को बगैर भरोसा दिलाए, तानाशाह सरकार ने किसान विरोधी अध्यादेश लाकर यह साबित कर दिया कि इस तानाशाह सरकार को किसानों की फिक्र ही नहीं है। इसिलिए तो इस तरह गोपनीय ढंग से कोरोनाकाल में भी किसान विरोधी विधेयक लाया गया। ताकि किसानों में ज्यादा विरोध ना भड़के। हालांकि इस विधेयक का पंजाब,हरियाणा, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों में किसानों ने सड़क पर उतकर भरपूर विरोध जताया। पर अफसोस अन्नदाताओं की पीड़ा, उनकी समस्या को सुनने, समझने की बजाय किसानों पर लाठी बरसवाए। लानत है ऐसी तानाशाह सरकार पर जिसने अन्नदाताओं की गाढ़ी मेहनत की कमाई पूंजिपतियों और कारपोरेट घराने को सौंपने का घिनौना साजिश रचा। और बड़ी तन्मयता से दोनों सदन में हंगामा के बावजूद किसान विरोधी यह विधेयक पास करा लिया। अब तक किसान कहीं कहीं गलती से ढगे जाते थे लेकिन अब इन पूंजिपतियों को ठगने,किसानों को लूटने का लाइसेंस दे दिया जाएगा। खूली छूट दे दी जाएगी। इसिलिए तो संविधान में उल्लेखित किसानों के मौलिक अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है। तभी तो किसान और कंपनी के बीच विवाद का फैसला एसडीएम और कलेक्कटर ही करेंगे। किसान अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकेगा। इससे और ज्यादा तानाशाही क्या हो सकती है जिसमें संविधान.कानून की मदद से भी अन्नदाता किसानों को वंचित किया जा रहा है। "जागो किसानों जागो" ---------


तानाशाह सरकार की किसानों पर तानाशाही।

◆ कृषि बिल : कांट्रैक्ट फार्मिंग में कंपनी के साथ विवाद होने पर कोर्ट भी नहीं जा सकेंगे किसान !

● आखिर क्यों .... पूछता है किसान...?

◆ कांट्रैक्ट फार्मिंग में किसान और कंपनी के बीच विवाद होने की सूरत में एसडीएम करेगा फैसला।

● आखिर क्यों .... पूछता है किसान...?

◆ सिर्फ डीएम के यहां हो सकेगी अपील।

● आखिर क्यों .... पूछता है किसान...?

◆ अदालत में नहीं जा पाएगा कोई पक्ष।

● आखिर क्यों .... पूछता है किसान...?

◆ एग्रीकल्चर बिल: कांट्रैक्ट फार्मिंग में कंपनी के साथ विवाद होने पर कोर्ट नहीं जा सकेंगे किसान

● आखिर क्यों .... पूछता है किसान...?

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