जनप्रतिनिधि और राजनीतिक पार्टी को आंदोलन की खुली छूट, सिर्फ आम लोगों पर कानून का शिकंजा !

 जनप्रतिनिधि और राजनीतिक पार्टी को आंदोलन की खुली छूट, सिर्फ आम लोगों पर कानून का शिकंजा !

 जिले में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक धारा 144 लागू होने के बाद भी जगह-जगह उमड़ रही भीड़।

◆ कार्रवाई के नाम पर प्रशासनिक भेदभाव खुलकर आया सामने।

मिशन क्रांति न्यूज. जांजगीर-चाम्पा। 


जिले में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण की रोकथाम व बचाव के लिए जिलादंडाधिकारी और कलेक्टर यशवंत कुमार ने 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक धारा 144 लगाए जाने भले ही आदेश जारी कर दिया हो। लेकिन जिले में धारा 144 प्रभावी होने के बाद भी लोगों की भीड़ उमड़ रही है। विडम्बना तो यह है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को लेकर कभी कार्यालयों का घेराव कर रहे हैं तो कभी वे किसी मुद्दे पर लोगों की भीड़ लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में ना तो प्रशासनिक अमला द्वारा अब तक ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया गया और ना ही किसी आंदोलनकारियों के खिलाफ अब तक किसी तरह की कोई कार्रवाई की गई।जिले में धारा 144 प्रभावी होने के बाद भी 17 सितम्बर को दुरपा के ग्रामीणों द्वारा शिवरीनारायण थाने का घेराव किया गया। पर कार्रवाई शुन्य। शिव सैनिकों द्वारा भीड़ इकठ्ठा कर कंगना रणावत के खिलाफ नारेबाजी कर पुुतला दहन भी किया गया। इसी दौरान कई संगठनों द्वारा पकौड़ा बेचकर विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं फल वितरण के दौरान भीड़ जुटाकर कार्यक्रम का आयोजन कर खुब वाह-वाही बटोरी गई। मगर इस दौरान किसी को भी कोरोना संक्रमण का भय नहीं रहा। ऐसे में कोरोना संक्रमण की रोकथाम करने या धारा 144 के उल्लंघन पर आंदोलनकारियों पर किसी तरह कार्रवाई करने प्रशासनिक अमलों ने रूची क्यों नही दिखाई। क्या धारा 144 सिर्फ आम लोगों के लिए है। जहां एक ओर कोरोना काल में भीड़ एकत्रित करने पर प्रशासनिक पाबंदी है वहीं दूसरी ओर एक रसूखदार व्यापारी ने चंद मुनाफे के लिए सस्ते दाम में कम्बल का प्रलोभन देकर कई दिनों तक ग्राहकों की भीड़ एकत्रित की। तब प्रशासनिक अमला कहां थी। जबकि उक्त व्यावसायी के दुकान में दो कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद ना तो इसे कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया और ना ही कोई कार्रवाई की गई। परिणाम स्वरूप सामान्य दिन की तरह हर रोज उक्त दुकान खुलता रहा और ग्राहकों की भीड़ भी उमड़ती रही। एसडीएम ने कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया। पर कई दिनो तक कार्रवाई शुन्य रहा। वहीं दूसरी ओर किसी मकान और मोहल्ले में कोरोना संक्रमित पाए जाने पर उसे कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया। ऐसे में प्रशासन का दोहरा चरित्र अब सामने आ गया है। और 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक धारा 144 लागू करने का फरमान पूरी तरह असफल साबित हो रहा है। अब ऐसे में लगने वाले लाकडाऊन की सार्थकता पर सवालिया निशान है कि क्या प्रशासनिक नियम कानून.सिर्फ आम जनता के लिए है या फिर ऊंचे ओहदे पर बैठे जनप्रतिनिधि और रसूखदार व्यावसायियों के लिए भी यह कानून लागू है। बहरहाल बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर कई तरह की विसंगतियां सामने आ रही है जिसे लेकर लोग भ्रमित हैं और प्रशासनिक नियमों में दोहरीनीति अफनाए जाने से भी वे बेपरवाह.हैं बेखौफ हैं।

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