मेरी त्वरित,,,स्वरचित,, कविता..झूठ का "पर्दाफाश" करे तो"पत्रकारों" को "धमकाते" हो... "खबर" प्रकाशन कर दे तो,,, दुश्मन बन जाते हो....
कांकेर में "पत्रकारों" के साथ "सत्तारूढ़" पार्टी के कुछ गुंडों द्वारा मारपीट की शर्मनाक घटना और सरकार की चुप्पी पर मेरी यह त्वरित "स्वरचित" कविता सभी "पत्रकार" साथियों को सादर प्रेषित है...
डायमंड शुक्ला की कविता...
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झूठ का "पर्दाफाश" करे तो"पत्रकारों" को "धमकाते" हो...
"खबर" प्रकाशन कर दे तो,,, दुश्मन बन जाते हो...
"पत्रकार" को डराने,,,गुंडों से पिटवाते हो...
भेड़िए हो तभी तो भीड़ में अपनी "ताकत" दिखाते हो...
"कलमकार" हैं हम कलम से बंदूकधारियों,,, को भी डराते हैं...
कानून के दायरे में रहकर गुंडों को "सबक" सिखाते हैं...
शेर हैं असली "पत्रकार" सब ...जो सीधे नजरें मिलाते हैं...
"नाराजगी" खबरों में दिखाते....हर दिन कितनों से टकराते हैं...
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं हम,,,सच से अवगत कराते हैं..
चुप्पी साधे हो सरकार.,,,खुद को पत्रकार हितैशी.बताते हो...
भूमाफिया को संरक्षण..अफसरों से मनमानी करवाते हो...
सत्ता के मद में चूर होकर क्यों अपनी कब्र खुदवाते हो...
राजनीतिक दांवपेंच से,,क्या कुछ नहीं कर जाते हो...
बातें लोगों तक पहुंचाने "प्रेस कान्फ्रेस कराते" हो...
पत्रकारों की कर्मठता,,इतनी जल्दी कैसे भूल जाते हो...
गुंडों को "सख्त" सजा हो,,,ये बात "अमल" में नहीं लाते हो...
"पत्रकार"को मिले "सुरक्षा" ऐसा "कानून" क्यों नहीं बनाते हो...
प्रदेश आज "खौफजदा" है..."छत्तीसगढ़ियों" को सताते हो...
पंद्रह साल वनवास झेलकर भी वही...गलती दोहराते हो...
लोकतंत्र है "जनादेश" है ...ये बात क्यों भूल जाते हो...
जनता के सामने खुद को सीधे साधे "किसान" पुत्र बताते हो...
लंबा सफर तक "राजनीति" में फिर भी गुंडागर्दी की पाठ पढ़ाते हो...
झूठ का "पर्दाफाश" करे तो"पत्रकारों" को "धमकाते" हो...
खबर प्रकाशन कर दे तो दुश्मन बन जाते हो...
"पत्रकार" को डराने,,,गुंडों से पिटवाते हो...
भेड़िए हो तभी तो भीड़ में अपनी "ताकत" दिखाते हो...
"कलमकार" हैं हम कलम से बंदूक को भी डराते हैं...
।।जय हिन्द।।


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