किसान,,मजदूर और बेरोजगारों के लिए सरकार के पास नही कोई कारगर नीति,,,सिर्फ छलावा !

 किसान,,मजदूर और बेरोजगारों के लिए सरकार के पास नही कोई कारगर नीति,,,सिर्फ छलावा ! 

◆ सत्ता के मद में चूर राजनेता सिर्फ लोकलुभावने योजना शुरू कर लूट रहे झूठी वाहवाही।
◆ जनहित के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों
विफल
◆ कोरोना (कोविड 19) महामारी के समय सामने आया सरकार का असली चेहरा
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 टिप्पणी : 
सरकार के खिलाफ

डायमंड शुक्ला
प्रधान संपादक, मिशन क्रांति न्यूज


मिशन क्रांति न्यूज,जांजगीर-चाम्पा।
आजादी के इतने साल गुजर जाने के बाद भी आज पर्यंत किसान,मजदूर और बेरोजगारों के हालात बदलने सरकार के पास कोई कारगर नीति नही है। जिसके परिणाम स्वरूप किसान,मजदूर और बेरोजगारों की स्थिति सुधरने की बजाय बद से बदतर होते जा रहा है। किसान और मजदूर गरीबी और आर्थिक मंदी की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं,बेरोजगार आत्मदाह करने आमादा है पर अफसोस सरकार चाहे वह केंद्र की हो या राज्य कि सिर्फ सत्ता के मद में चूर लोकलुभावने योजना चलाकर झूठी वाहवाही लूट रही हैं। 

सरकार का असली चेहरा कोरोना महामारी के दौरान खुलकर सामने आया है। लाकडाउन के दौरान मजदूरों को महज एक डेढ़ महिने राज्य की सरकारें रख नही पाई। केंद्र सरकार को तो मानो इस समस्या से कोई सरोकार ही नही। मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे भूख में बिलखते रहे , बुजूर्ग मजदूर तड़पते रहे, महिला मजदूरों के आंख से आंसू बहती रही और सरकार कुंभकर्णीय निद्रा में नजर आए।

 
तमाशबीन की तरह सरकार का रवैया उस समय तो सामने आया ही। इसके बाद लगातार किसान,मजदूर और बेरोजगार आर्थिक मंदी से गुजर रहे हैं और सरकार गिनती के कुछ किसानों के खाते में महज 2 हजार रुपये डालकर वाहवाही लूटती रही। या फिर जनधन खाते में महज 500 रूपये जमा कराकर अपनी जिम्मेदारी से मुकर गए। सरकार से सवाल है कि क्या दो हजार और पांच सौ देकर इनकी आर्थिक मंदी को देर कर दिए। यह लोकलुभावने योजनाएं बंद करके कोई कारगर नीति इजात कर अन्नदाताओं का सम्मान रखिए। युवा बेरोजगार जो कल देश के भविष्य हैं बेरोजगारों को सम्मान के साथ रोजगार या स्वरोजगार मुहैया कराइए। आज बेरोजगारी चरम पर है।
 किसान झोपड़ी में रहने मजबूर हैं, तन ढकने के लिए फटे कपड़े पहनने मजबूर है। जिम्मेदार सरकार सिर्फ ताल ठोंककर वाहवाही लूट रही है। आज गांवो में हालात ज्यों का त्यों है। सिर्फ शहरी क्षेत्र के हालात बदल रहे हैं। पर गांव पर कोई फोकस नही है। चंद गरीबों को पीएम आवास योजना के जरिए आशियाना दिलाकर वाहवाही लूट रही सरकार। पर आज भी किसान, मजदूर और बेरोजगारों के हालत बदलने कोई कारगर नीति सरकार के पास नही है। इसलिए सबसे ज्यादा पीडि़त किसान,मजदूर और बेरोजगार हैं। पर इनकी आवाज इनकी समस्याओं से सरकार को कोई सरोकार नही हैं। जिस दिन किसान,मजदूर और बेरोजगार संगठित होकर अपने अधिकार के लिए एक साथ अपनी आवाज मुखर कर मोर्चा खोल दे। उस दिन सरकार की कुर्सी हिल जाएगी। राजनीतिक पार्टी और दल दलदल में समा जाएगी, पर अफसोस हमारे देश में किसान,मजदूर और बेरोजगारों की इतनी बड़ी तादात होने के बावजूद ये आज सबसे ज्यादा पीड़ित हैं और केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर खूब वाहवाही लूट रहे हैं। वाह रे सरकार !
।।जय हिन्द।।





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