देश को "झकझोरने" वाली "हाथरस" की "शर्मनाक" घटना पर "सियासत" क्यों...? पत्रकार "डायमंड शुक्ला" की कलम से...

 देश को "झकझोरने" वाली "हाथरस" की "शर्मनाक" घटना पर "सियासत" क्यों...? पत्रकार "डायमंड शुक्ला" की कलम से...

पीड़िता को जीते जी तो "इंसाफ" नहीं मिला..मौत के बाद "सियासी" तमाशा कतई उचित नहीं...
◆ यूपी "सरकार" का रवैया और यूपी "पुलिस" की बर्बरता अंधेरगर्दी व गुंडाराज से कम नहीं।
● त्वरित टिप्पणी,

 ◆ डायमंड शुक्ला, प्रधान संपादक
       मिशन क्रांति न्यूज.


उत्तरप्रदेश के "हाथरस" में जिस तरह चार दरिंदों ने पीड़िता के इज्जत तार - तार कर उनकी जीभ काट दी..और उनके रीढ़ की हड्डी भी तोड़ दी...यह हैवानियत की हद है...देश को "शर्मशार" कर देने वाली इस घटना में पीड़िता के दोषियों के खिलाफ एफआईआर में करने में पुलिस लेटलतीफी करती है जो कतई उचित नहीं है..वहीं इलाज के अभाव में दर्द से कराहती न्याय की गुहार लगाती पीड़िता ने आखिरकार दम तोड़ दिया, लेकिन पीड़िता का मृत्युकालिक कथन से इस बात की पुष्टी हुई है की दरिंदों ने उनके साथ दुष्कर्म किया है पर अफसोस...मौत के बाद भी पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय उल्टे उनकी लाश को पुलिस परिजनों को नहीं सौंपा गया,,बल्कि यूपी पुलिस की बर्बरता,मनमानी और असली चेहरा खुलकर देखने को मिली , जहां रात में ही परिजनों की गैरमौजूदगी में पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जो कतई उचित नहीं है। 

इतना ही नहीं हद तो तब हो गई। जब इस शर्मनाक घटना में पीड़ित को इंसाफ दिलाने को छोड़ सियासत की सरगर्मी तेज हो गई है अब ऐसे में जहां कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार से मिलने के बहाने अपना सियासी चेहरा चमकाने हाथरस रवाना हुए,,,जहां यूपी पुलिस ने उन्हें रोका,धक्का मुक्की कर राहुल गांधी को गिरा दिया। अब यहां पीड़ित परिवार को इंसाफ का मुद्दा सियासी जंग में तब्दील हो गया और यूपी सरकार योगी आदित्यनाथ और पुलिस की बर्बरता खुलकर देश के सामने आ गया। जहां खाकी वर्दी के दम पर किस तरह एक नेता को ही नहीं बल्कि वकील, समाजसेवक, महिला सामाजिक कार्यकर्ता यहां तक मीडिया को भी हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलने की इजाजत नहीं दी गई। यह योगी सरकार का घिनौना चेहरा है...जहां पुलिस के बल पर वर्दी का खौफ दिखाकर हाथरस मामले में सियासत हो रही है। आखिर हाथरस मामले में ऐसा क्या है जिसे छिपाने उत्तरप्रदेश की सरकार के इशारे पर इस तरह अंधेरगर्दी पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया। वहीं हद तो तब हो गई जब मामले में डीएम पीड़ित परिजनों को धमकाने पर उतर आए हैं...उन्हें बयान बदलने की बात कही जा रही है..क्या इन सभी वाकये से राज्य सरकार बेखबर है..प्रशासन द्वारा इनकी बर्बरता क्या उचित है..वहीं अन्य कई राजनीतिक पार्टी भी इसमें सियासत चमकाने जंग में भाग लेने की मंशा से लगे हैं लेकिन यह भी सच है कि सरकार ऐसे मामले में गंभीरता दिखाते तो शायद किसी सियासी पार्टी को कुछ कहने, बोलने का अवसर नही मिलता लेकिन जिस तरह हाथरस में प्रशासन काम को अंजाम दे रहे हैं वह वाकई कटघड़े में खड़ा करने लायक है....जी हां हाथरस को पुलिस छावनी में तब्दील कर आखिर सरकार क्या बताना चाह रही है। यहां किसी जनप्रतिनिधि की ताकत ,जनाधार या सियासी जंग की बात नही हो रही है एक पीड़िता जिसकी दर्दनाक मौत हुई है...उसके गुनाहगारों को कठोर दंड दिलाने और पीड़िता को न्याय दिलाना है और पीड़ित परिवार भी इंसाफ ही चाहते हैं..आज देश की नजर हाथरस पर है लेकिन आपके हाथरस के डीएम, आईजी,एसपी, एसडीएम, एसपी और सभी प्रशासनिक अमलो ने भी इसे सियासी रंग देने में कोई कसर नही छोड़ा है...यदि वे अपने कर्तव्यों का सही ढंग से परिपालन करते तो इस तरह सियासत करने की नौबत तक नहुं आती। और अब तक पीड़िता को इंसाफ मिल गया रहता। पर अफसोस हमारे देश में किसी की इज्जजत तार-तार होने के बाद और मौत होने पर भी इंसाफ के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है... तब जाकर इंसाफ मिलता है बहरहाल पूरा मामला सियासी.हो गया है जिसमें हर प्रदेश के हर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडियाके माध्यम से एक दूसरी राजनीति क पार्टी पर निशाना साध रहे हैं...पर ऐसी घटना पर राजनीति से ऊपर उठकर सिर्फ और सिर्फ पीड़ित और उनके परिजनो को इंसाफ दिलाने का स्वर गूंजना चाहिए। आवाज मुखर होनी चाहिए ताकि ऐसी शर्मनाक घटना की पुनरावृत्ती ना हो। 



◆ "हाथरस" की घटना को लेकर कुछ अनसुलझे सवाल...
◆ शर्मनाक घटना के बाद "दरिंदों" के खिलाफ एफआईआर में लेटलतीफी क्यों...?
◆ अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनके इलाज में लापरवाही क्यों...?
◆ पीड़िता की मौत के बाद लाश परिजनों को क्यों नहीं सौंपी गई...?
◆ पीड़िता की लाश का अंतिम संस्कार रात में क्यों हुई..?
◆ अंतिम संस्कार पुलिस ने क्यों की...?
◆ पीड़िता के परिजनों को डीएम बयान बदलने क्यों धमका रहे...
◆ परिजनों को घर में ही नजरबंद कर दिया गया क्यों ....?
◆ पीड़ित परिवार से मिलने हाथरस जा रहे नेता,अधिवक्ता पर पुलिस की बर्बरता क्यों....?
◆ सिर्फ बीजेपी के जनप्रतिनिधियों को पीडि़त परिवार से मिलने की इजाजत क्यों...?
◆ पीड़िता की मृत्युकालिक कथन के बावजूद उनके साथ दुष्कर्म नहीं होने का झूठी अफवाह क्यों...?









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