जमीन विवाद में दरिंदों ने पुजारी को जिंदा जलाया ! जघन्य अपराध से मानवता हुई शर्मसार...
जमीन विवाद में दरिंदों ने पुजारी को जिंदा जलाया ! जघन्य अपराध से मानवता हुई शर्मसार...
◆ दिल दहला देने वाली इस घटना पर राजस्थान के सीएम गहलोत की चुप्पी समझ से परे ...
◆ अब राजस्थान के करौली के बुकना गांव की दर्दनाक घटना पर राहुल गांधी कुछ बोलेंगें या सिर्फ यूपी के हाथरस पर करेंगे सियासत !
त्वरित टिप्पणी
★ डायमंड शुक्ला,,,प्रधान संपादक
मिशन क्रांति न्यूज.
उत्तरप्रदेश के हाथरस की घटना और उस पर सियासत अभी पुरी तरह खत्म भी नहीं हुई है, और अब राजस्थान के कलौरी जिले के बुकना गांव में एक पुजारी को जिंदा जलाने की घटना ने इंसानियत को एक बार फिर शर्मसार कर दिया है, और इस जघन्य अपराध ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है, जहां एक तरफ उत्तरप्रदेश के हाथरस में पीड़िता के इज्जत तार-तार कर उसे मौत के मुंह मेंं धकेल दिया गया, परिजनों को लाश को अंतिम संस्कार तक नही करने दिया गया। वहीं दूसरी ओर राजस्थान के कलौरी के बुकना गांव में चंद जमीन की खातिर गांव में दबंगों ने एक पुजारी को जिंदा जला दिया। 80 फिसदी आग में झुलसे दर्द से कराहते पुजारी ने उपचार के दौरान गुुुरूवार को अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना से जहां मृतक पुजारी के परिजन और ग्रामीण आक्रोशित नजर आए। वहीं देश को झकझोरने वाली इस घटना से पूरे देश में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सबने इस शर्मनाक घटना को मानव समुदाय के लिए घातक बताया और दरिंदों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी। पर अफसोस इस बात का है कि आज के इस शिक्षित और सभ्य समाज में हमारे देेेश में किसी को जिंदा जला दिया जाना रूह कंपा देने वाली घटना है...मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस जघन्य अपराध पर राजस्थान सरकार की चुप्पी समझ से परे है। वहीं राहूल गांधी जो हाथररस की घटना पर पीड़िता के परिजनों से मिलकर उन्हें ढाढस बंधाया। और न्याय दिलाने की बात कही। तो क्या राहूल सिर्फ गैर कांग्रेसी राज्य जहां कांग्रेस की सरकार नहीं है वहीं अपनी मानवीय संवेदना दिखाएंगे। या फिर राजस्थान के कलौरी के इस घटना पर भी राहूल का एक्शन वही होगा। जैसा हाथरस में दिखा। हालाकि वहा एक पीड़िता के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई थी और जिव्हा काट दी गई थी यहां तक पीड़िता के मरने के बाद उनके परिजनों को पीड़िता की लाश तक नहीं दी गई और पुलिस प्रशासन ने रात में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया। इस पर खूब सियासत भी हुई। यह मामला अभी पूरी तरह खत्म भी नही हुआ है और अब राजस्थान के कलौरी में पुजारी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यहां राजस्थान की दर्दनाक घटना पर राहूल गाधी और वे तमाम राजनेता कुछ बोलेंगे,,,कुछ करेंगे भी या फिर सिर्फ गैर कांग्रेसी सरकार वाले राज्य पर ही सियासत करते नजर आएंगे।
क्योंकि पुजारी के मौत के बाद गांव में काफी लंबे समय तक कोई सत्तापक्ष का कोई बड़ा नेता गांव नही पहुंचा। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश है। आखिर मृतक के परिवार के प्रति सरकार की संवेदनाए खत्म हो गई है। वे न्याय चाहते हैं...मृतक पुजारी के परिवार की माली हालत भी ठीक नही है। झोपड़ीनुमा मकान में रह रहे मृतक के परिजनों को कोई मुआवजा कोई मदद करने नही पहुंच रहा है। ये कैसी सियासत जहां सिर्फ यूपी का अपराध राजनैतिक पार्टीयों के नुमाइंदों को नजर आते हैं और जहां कांग्रेसी सत्ता है वहां की घटना के बाद इन्हें सांप सूंघ देता है। काश यहां ऐसी घटनाओं पर सियासत नहीं मानवीय संवेदनाएं दिखे और मृतक के परिजनों की हर संभव मदद को हाथ बढ़े तो बेहतर होता। सियासी चश्मा उतारकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की पुरजोर कोशिश हो। और परिजनों को यथासंभव सरकारी सहायता प्रदान हो। सरकार का दायित्व है कि पीड़ित परिजनों की मांगों पर ध्यान दे और प्रशासन को शीघ्र कार्रवाई के लिए निर्देशित करे।


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