"जिंदगी" का ओ दिन सबसे प्यारा था
"जिंदगी" का ओ दिन सबसे प्यारा था
चांद ने जब किया इशारा था ।
रचनाकार -प्रताप चंद साहू
जिला - जांजगीर (छत्तीसगढ़)
शीर्षक - चांद ने किया इशारा था
विधा - गजल
देख तुम्हें शर्मा गई जो -२
फूल नहीं ओ तारा था
जिंदगी का ओ दिन प्यारा था।।
कैसे समझूं मैं दुर तुमको -२
बैठी अपना किनारा था
जिंदगी का ओ दिन प्यारा था।।
कभी जलते और कभी बूझते -२
वह जुगनू बस सहारा था
जिंदगी का ओ दिन प्यारा था।।
कैसे भूल पाऊं ओ सबब -२
जब चमकी उनकी सितारा था
जिंदगी का ओ दिन प्यारा था।।
नहीं किसी कि नजर उन पर -२
वह तो बस हमारा था
जिंदगी का ओ दिन प्यारा था
उनको देने के वास्ते मुझे-२
आसमां ने पुकारा था
दिल से लगाए खत-तस्वीर-२
वह केवल तुम्हारा था
जिंदगी का ओ दिन प्यारा था।।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें