आज से शारदीय "नवरात्रि" प्रारंभ,,,नवरात्रि में "उपासक "ये सात कार्य अवश्य करे... मिशन क्रांति न्यूज."धर्म-कर्म"

 आज से शारदीय "नवरात्रि" प्रारंभ,,,नवरात्रि में "उपासक "ये सात कार्य अवश्य करे...

मिशन क्रांति न्यूज."धर्म-कर्म"

मिशन क्रांति न्यूज, जांजगीर -चाम्पा। शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर,, यानी आज से प्रारंभ है..."नवरात्रि" में "जगत जननी मां" के "उपासक" अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए नौ दिन तक उपवास रखते हैं,,,उपासक को "नवरात्रि" के नौ दिनों तक ये सात काम अवश्य करनी चाहिए...ऐसी मान्यता है कि पूरी श्रद्धा भक्ति से माता रानी की सेवा करने से मां उनकी संपूर्ण कष्टों को दूर करती है और सभी "मनोकामनाएं" पूरी होती है...

नवरात्रि में हर दिन मां के श्री चरणों में ताजे फूल चढ़ाएं,,,पूजा कमरा के अलावा पूरी घरों की साफ-सफाई पर ध्यान दें,,,हर दिन दुर्गा सप्तशती का करें पाठ,,,गाय को प्रत्येक दिन खिलाएं रोटी,,,घर में लगाएं तुलसी का पौधा,,,अष्टमी के दिन खरीदें झाडू़,,,,अष्टमी के दिन विशेष रूप से चढ़ाएं कमल गट्टा। नवरात्रि को उक्त सात कार्य करना काफी शुभ माना गया है और इससे मन की संपूर्ण कामनाएं पूरी होती है...ऐसी मान्यता है। "जगत जननी मां दुर्गा" के नौ रूप और उनके नाम का अर्थ...

● नवदुर्गा के नौ रूप –

★  शैलपुत्री– इसका अर्थ होता है। पहाड़ों की पुत्री

★ ब्रह्यचारिणी– इसका अर्थ होता है। ब्रह्यचारिणी 

★ चंद्रघंटा-इसका अर्थ होता है। चाँद की तरह चमकने वाली।  

★ कूष्माण्डा– इसका अर्थ होता है। पूरा जगत उनके पैर में है।   

  ★ स्कंदमाता– इसका अर्थ होता है।कार्तिक स्वामी की माता     ★कात्यायनी– इसका अर्थ होता है।कात्यायन आश्रम में जन्मी।  ★कालरात्रि– इसका अर्थ होता है। काल का नाश करने वाली। ★महागौरी– इसका अर्थ होता है। सफेद रंग वाली।

   ★  मां सिद्धिदात्री– इसका अर्थ होता है।सर्व सिद्धि देने वाली। 

● सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

★ ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

★ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

★ या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

★या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

★ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

★ या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

★ या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

★ या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

● नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' का जाप करें... ।।    ।।जय मां जगदम्बा,,,जय मां चण्डी ।।

"मां" की "कृपादृष्टी" सब पर बनी रहे...

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