एक दूसरे को लूट कर,,,यहां सब कर रहे कमाई... बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...डायमंड शुक्ला की कलम से...

 एक दूसरे को लूट कर,,,यहां सब कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...



( देश में बढ़ते "भ्रष्टाचार", "बेरोजगारी" और "किसानों" के मुद्दों पर रचना )

स्वरचित -डायमंड शुक्ला (मेरी सबसे बड़ी कविता 23 अगस्त 2020)

मिशन क्रांति न्यूज. 

काव्य संग्रह....

क दूसरे को लूट कर,,,यहां सब कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

यही फार्मूला चल रहा,,,यह फार्मूला सबने अपनाई...

तभी तो पेटी भर रहे,,,खा रहे मलाई...

ये कैसी घड़ी आई,...ये कैसी घड़ी आई...

हर तरफ लूट है,,लूट के लिए मानो छूट है...

लूटखसोट के धंधे में लूटेरों ने पैर जमाई...

सच का पर्दाफाश ना हो इसलिए...सफेदपोश है भाई...

कर रहे मोटी कमाई,,,चहूंओर लूट है छाई...

शिक्षा को व्यवसाय बना लिए,,,

रिश्वत से सबको मना लिए...

नौकरी भी पैंसों के दम पर...

राजनेता और पार्टी रम पर...

ठेका टेंडर सब बिकते हैं...

यहां ईमान कहां टिकते हैं...

होड़ लगी बेईमानी की...घनघोर घटा है छाई...

एक दूसरे को लूट कर,, सब कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

झूठ के बल बर राजनीति ..

राज है पर खतम है नीति...

जमीन हो गए दलाल के गला घोंट दी...

कृषक लाल के...

आठ उंगलियों पर अंगूठी ...

किसानों के उखाड़ दी घूंटी...

पेट काटने वाले को लज्जा भी नही आई...

अफसरों की बात निराली..

मंत्री के साथ बजा रहे हैं ताली..

कर्मचारी के भरोसे रिश्वत का चल रहा है खेल...

वो करे सब जायज यारों,,,आप करो हो जाए जेल..

पारंगत हैं खेल में बोली जो लगाते हैं..

हर काम का दाम तय,ये बड़ी संजीदगी से बतलाते हैं..

खौफ नही कानून का इनको ये खूद कानून बन जाते हैं...

क्षत्र छाया आला अफसर का ये औरों को डराते हैं...

मोटी रकम ले काम करके कहते इसे भलाई... एक दूसरे को लूट कर,, यहां सब कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

बेरोजगारी है चरम पर,,, मचा है हाहाकार...

आंख बंद कर लिए सभी ने,,, ऐसे शासक को धिक्कार ...

ऐसे सिस्टम को धिक्कार...ऐसे अफसर साही को धिक्कार...

अन्नदाता के आंख में आंसू....फिर भी सब मुकदर्शक बने हुए... सफेद पोश में नेता हैं और अफसर उन पर तने हुए...

मजदूरों का खाना,और पहनावा नजर नही आता।

लोकतंत्र की बात करते सिर्फ वोटर तुम्हें है भाता...

(सिर्फ चुनाव के समय वोटर मजदूर ,किसान को एकबार अपने स्वार्थ की खातिर सम्मान देते हैं। झूठा वादा करते हैं)

घर - घर जाकर वादा करके हर घर में आग लगाई...

जीत मिल गई जब तुम्हे तो गांव की याद भी नहीं आई...

एक दूसरे को लूट कर ,, यहां कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

डाक्टर भी अब एक्टर हो गए,,, प्राइव्हेट क्लीनिक चलाते हैं... सरकारी मुलाजिम हो तब ड्यूटी कहां निभाते हैं...

गरीबों से परहेज करते,,,अमीरों के घर भी चले जाते हैं..

स्टेटस की बात करते खूद को डाक्टर बताते हैं...

डाक्टर तो हैं लेकिन करते हैं मोटी कमाई...

एक दूसरे को लूट कर यहां कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

पुलिस प्रशासन सबसे भ्रष्ट है...

सिस्टम यहां पुरी तरह नष्ट है...

सुरक्षा के ये नुमाइंदे ,,,,इनको आता सब कानून कायदे

खौफ देकर वर्दी का लेते कितने हैं फायदे...

शर्म बेच खाते हैं ,,,शव पर भी पैसे कमाते हैं...

भूल गए मानवता ये ,,,भूल गए सब वायदे...

अमीरों को सलाम ठोकते गरीबों को डंडा दिखाते हैं...

सुरक्षा के नाम पर ये जनमानस को भय दिखाते हैं... खाकी वर्दी के रौब से.. करते हैं धुलाई...

एक दूसरे को लूट कर यहां कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

वकीलों की बात भी कर लें...

थोड़ा इनसे मुलाकात कर लें...

काले लिबाज वालों से भी जरा आइये जुबानी हाथ कर लें...

सच्चाई का गला घोंटने,,,झूठ का सच से मुह मोड़ने कानून के हैं नुमाइंदे,,,

छूट है इनको नियम तोड़ने सच को झूठ साबित करने में इनको महारथ हासिल है...

इनके पास दिल नही है...मामलो से जुड़े अनगिनत दलील है..

जीत का परचम लहराने जाने कितने गवाही...

एक दूसरे को लूट कर कर यहां कर रहे कमाई...

बेईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

व्यापारी तो सब पर भारी...

कीमत तय करने के अधिकारी...

एक का दो, दो का चार...चार ,,,

बढ़ा रहे रेट बार बार समान...

समान्य नहीं...खास सभी रहता है...

मूल्य इसिलए बढ़ा दिए खुलकर बात यही कहता है...

दूध तो दूध इन्होंने पानी में दूध मिलाई...

अमृत खुद पीते हैं और ग्राहक को जहर पिलाई...

इनकी खुब कमाई,भैया इनकी खूब कमाई...

एक दूसरे को लूट कर यहां कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

न्याय पालिका भी दम तोड़ रहे...

सच्चाई से मुंह मोड़ रहे...

कार्यपालिका चला रहा है... मनमुताबिक बुला रहा है

( खौफ खाकर न्यायालय ने मीडिया से ये कहा है...जब पहली बार भारत की न्यायपालिका को मीडिया के सामने आना पड़ा था )

जज की हत्या करा दिए ...

मौत की नींद सुला दिए ...

न्यायमूर्ति न्याय मांग रहा...

न्यायालय क्यों दूर भाग रहा...

झूठ के पुलिदों पर बैठे शासक दे रहे दुहाई...

फैसला किसके हाथ मे है...ये कोई जानते नही भाई...

एक दूसरे को लूट कर यहां कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

मीडिया भी हो गया गुलाम...

शासक को कर रहे सलाम...

जनहित मुद्दा भूल गए... जैसे सच्चाई धूल गए...

शासन का गुणगान करे...

जनता को अनजान करे...

देश के हालातों पर अब चर्चा होना बंद हुआ...

किसानों के देश को भूले... नेता अभिनेता पर आवाज बुलंद हुआ... अन्नदाताओं और मजदूरों की पीड़ा इनको नही दिखता है...

अब साफ हो गया मीडिया भी चंद पैसों में बिकता है...

अपनी टीआरपी बढ़ाने, कुछ भी खबरे दिखाते हैं...

जनमानस और ज्वलंत मुद्दों से जानें क्यों नजरें चुराते हैं...

सब कुछ अच्छा हो रहा देश में बस यही रिपोर्ट बताते हैं...

नेताओं की भाषण बाजी और उपलब्धियां गिनाते हैं...

पेड न्यूज और विज्ञापन से न्यूज चैनल चलाते हैं...

हिमाकत हैं उनकी करते,,,और खुद को जनता का हितैषी बताते हैं... खबरों की विश्वनियता को लेकर उठते कई सवाल हैं...

पत्रकारिता मानो खत्म हो गई,,,बस इसी बात का मलाल है..

 मीडिया से हम भी जुड़े हुए...हम किसानों का मुद्दा उठाते हैं... मजदूरों के हालात हैं क्या,,,यही सच हम दिखाते हैं...

आजादी के सालों बाद भी गांव में कितनी गरीबी है...

नेताओं आंख खोल लो बतलाते बहुत करीबी हो...

दूसरों को निवाला देने वालों के हालात क्यों नही बदला है...

कभी भुखमरी,बाढ़ कभी तो रोटी के लाले पड़ते हैं...

सरकारी गोदाम मे भले ही लाखों टन अनाज सड़ते हैं...

अब जाग जाओ नही तो किसान को आगाज करना होगा...

लोकतंत्र की ये जड़े हैं...इनको मजबूत करना होगा।

अब तक नजर अंदाज किए अब आंख खोल लो भाई...

एक दूसरे को लूट कर यहां कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

बेरोजगारी दूर करो ...स्वरोजगार की अलख जगाओ...

बेरोजगारों को संबल देने अब तो आगे हाथ बढ़ाओ...

"बेरोजगारी" दूर हो तो, देंगें सभी दुहाई...

एक दूसरे को लूट कर,,,यहां सब कर रहे कमाई...

बईमानी का पाठ पढ़ रहे,,,,कह रहे इसे चतुराई...

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वंदेमातरम स्कूल के राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर में स्वास्थ्य जागरूकता एवं महिला सशक्तिकरण पर हुई बौद्धिक परिचर्चा

अपराध का गढ़ बन रहा छत्तीसगढ़ - चंदेल

जांजगीर में सुपर मार्केट की तर्ज पर खुला देशी सी-मार्ट