गिरगिट की तरह रंग बदलते दिग्गज नेता और सियासी दावपेंच के दो पाट में पीसते जमीनी कार्यकर्ता !!! पढ़िए पूरी खबर प्रधान संपादक डायमंड शुक्ला की कलम से...

 गिरगिट की तरह रंग बदलते दिग्गज नेता और सियासी दावपेंच के दो पाट में पीसते जमीनी कार्यकर्ता !!!

★ प्रधान संपादक डायमंड शुक्ला की कलम से...

मिशन क्रांति न्यूज. जांजगीर-चाम्पा। वर्तमान में छत्तीसगढ़ की सियासत और सियासी चाल खासकर जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए राजनैतिक भूचाल से बढ़कर नही है...

जी हां...हाल में हुए निगम मंडल की नियुक्ति में जहां खासकर विधानसभा अध्यक्ष के गृह जिले में मुख्यमंत्री के करीबियों का दबदबा रहा...मतलब साफ है...जांजगीर चाम्पा की सियासी तासीर कुछ ठीक नहीं हैं...जहां निगम मंडल में नियुक्ति को लेकर कुछ पार्टी के कार्यकर्ता नाराज चल रहे हैं वहीं कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष को बदलने को लेकर भी लोगों द्वारा कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है...छग में पंद्रह साल बाद सत्ता में बदलाव से जहां राज्य में राजनीति का स्वरूप ही बदल गया। कभी छग में ढाई साल में सरकार बदलने की चर्चा आम रही...तो कभी मंत्रियों की पूछ परख ना होने के आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी देखने को मिला। अब निगम मंडल की नियुक्ति पर पार्टी नेता ही नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाए जा रहे हैं...सुनने में यह भी आर रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरण दास महंत तो पीसीसी अध्यक्ष को ही बदलने जोरआजमाईश में लग गए हैं...दरअसल उक्त मामले का मुख्य कारणा कांग्रेस के जिलाअध्यक्ष चौलेश्वर चंद्राकर को माना जा रह है...सूत्रों की माने़ तो डॉ. महंत बदलाव चाहते हैं। बहरहाल छग में सियासत के कई रंग सामने आ रहे हैं...जहां स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंह देव और बघेल सरकार में पद को लेकर ढाई-ढाई साल वाली बात पर आपसी तनातनी...की बातें सामने आ रही है...हालांकि इस ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री वाले सवाल पर भूपेश बघेल कांग्रेस के हाईकमान के फैसले पर पद छोड देने की बात कई बार कर चुके हैं...वहीं कुछ मंत्री खुद को ठगा महसूस भी कर रहे हैं...क्योंकि पद तो है पर पावर स्वीच किसी और के हाथ होने की बातें कही जा रही है...सौ बात की एक बात तो है कि छग की राजनीति में अभी कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है...बस दबी जुबान से चेहरा लटकाकर सब ठीक होने का राग अलाप रहे हैं...पर ठीक कैसे है जनाब...और अगर सब ठीक है तो ठीक तरह के परिणाम पार्टी में दिख भी क्यों नहीं रहे...? इस माकूल सवाल का जवाब तो जनता भी ढूंढ रही है...पर पता है उन्हें ये राजनेताओं के घर का मामला है...अलग-थलग होकर घर उजाड़ना नही चाहेंगे...पंद्रक्ह साल सत्ता से वंचित कांग्रेस पार्टी इससे बखूबी वाकिफ है..इसलिए जो चल रहा है ...चलने दीजिए...यही मंशा है सभी नेताओं की। दरअसल मुख्यमंत्री बनने की होड़ में जब छग के भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू, डॉ चरणदास महंत और टीएस सिंह देव चार कांग्रेसी दिग्गज आमने सामने आ गए तो सभी दिग्गजों की मानो पैर तले जमींन ही खिसक गई...ऐसे में सबके मन में लड्डू फूट रहे थे कि वे छग के मुख्यमंत्री की कमान संभाले...ऐसे में चारों दिग्गजों को दिल्ली का बुलावा आया...पेशी हुई...तब हाईकमान ने बमुश्किल समझा बुझाकर भूपेश बघेल पर मुहर लगा दिया। ऐसे म़े बाकी दिग्गजों को मंत्री बनाकर और डॉ महंत को विधान सभा अध्यक्ष के पद पर आसीन कर दिया गया। पर सत्ता पक्ष में शीर्ष पद पर बैठना कौन नहीं चाहता है...दबी पीड़ा दबी जुबान से इसी तरह बीच बीच में देखने को मिलता है...जो छग के सियासत में सुस्पष्ट दिख रहा है। अब सियासी चाल में कौन किस पर भारी पड़ता है यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा। बहरहाल छग में कांग्रेस पार्टी में आपसी कलह की लहर की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। 

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