बेटों को नौकरी दिलाने गोधना स्कूल के समिति के अध्यक्ष और प्राचार्य ने नियमों की अनदेखी कर शिक्षकों की कर दी भर्ती !
बेटों को नौकरी दिलाने गोधना स्कूल के समिति के अध्यक्ष और प्राचार्य ने नियमों की अनदेखी कर शिक्षकों की कर दी भर्ती !
◆ कोरोना काल में आपदा को अवसर बनाते हुए बेटे सहित आठ शिक्षकों की कर दी भर्ती।
◆ समिति का अध्यक्ष मिडिया से बना रहा दूरी,,,तो प्राचार्य दे रहा गोलमोल जवाब।
★ डायमंड शुक्ला
मिशन क्रांति न्यूज. जांजगीर-चाम्पा। एक तरफ जब देश कोरोना से जूझ रहा था वहीं दूसरी ओर शासकीय अनुदान प्राप्त उच्चतर माध्यमिक स्कूल गोधना के समिति के अध्यक्ष और प्राचार्य अपने बेटे को नौकरी दिलाने आपदा को ही अवसर तब्दील कर लिए। जी हां बेटे सहित आठ शिक्षकों की भर्ती पूरी तरह सरकारी नियमों को ताक में रखकर किया गया है।मामले का खुलासा होने के खौफ से जहां समिति का अध्यक्ष केके सिंह मिडिया से दूरी बना रहा है, वहीं दूसरी ओर स्कूल के प्राचार्य प्रदीप कुमार तिवारी को भी संबंधित मामले में मुंह नहीं खोलने सख्त हिदायत दे रखा है। हालाकि प्राचार्य तिवारी ने दबी जुबान से इस बात को स्वीकार किया है कि मीडिया के सामने चुप्पी साधने के लीए समिति के अध्यक्ष उन पर दबाव बनाते रहे हैं।
हालाकि बुधवार को मीडिया के सामने उन्होंने चुप्पी तो तोड़ा पर संबंधित शिक्षक भर्ती को सही करार देते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। हालाकि उक्त गंभीर मामले की शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच कमेटी कठित कर दिया है साथ ही नए भर्ती हुए शिक्षकों के वेतनमान रोकने के निर्देश भी दे दिए हैं। बहरहाल जांजगीर चाम्पा में सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल में जिस तरह गफलतबाजी कर अपनों को लाभ पहुंचाने का खुला खेल चल रहा है। वह किसी से छिपी नही है पर अफसोस समिति का अध्यक्ष जवाब देने से बच रहा है वहीं दबंगई इतनी की मीडिया से प्राचार्य को भी मुखातिब होने से मना कर दिए हैं ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनाब भ्रष्टाचार की चरम सीमा लांघकर भी सहज - सरल बनकर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने आमादा है और प्राचार्य श्री तिवारी भी खुद को पाक साफ बचाने की जोर आजमाईश में लगा हुआ है। प्राचार्य प्रमोद कुमार तिवारी की नाफरमानी इतनी की कभी भर्ती होने की बात करता है तो कभी भर्ती प्रक्रिया शिथिल कर देने कघ बात करता है। श्री तिवारी का यह दोहरा बयान मीडिया के समझ से परे है। बहरहाल उक्त शिक्षक भर्ती मामले की विभागीय जांच चल रही है। और जल्द ही जांच में खुलासा हो जाएगा। पर सवाल यह उठता है कि यदि समिति के अध्यक्ष और प्राचार्य का फर्जी तरीके से शिक्षक भर्ती हुआ है तो ऐसे नुमाइंदों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की दरकार है ताकि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में अपनों को लाभ दिलाने इस तरह की गफलतबाजी,गड़बड़ी की पुनर्रावृत्ती ना हो।
◆ समिति अध्यक्ष "पत्रकारिता" का दिखा रहा है धौंस !
गुपचुप तरीके से शिक्षक भर्ती मामले के संबंध में सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल गोधना के समिति के अध्यक्ष केके सिंह से उक्त मामले के संदर्भ में उनका पक्ष जानने मीडिया के साथियों ने संपर्क साधना चाहा तो समिति के अध्यक्ष जनाब केके सिंह ने भाई के पत्रकार होने का धौंस तो जमाया ही साथ ही खुद को भी पत्रकार बताने में जरा सा भी परहेज नहीं किया। ऐसे से में सवाल यह उठता है की यदि समिति के अध्यक्ष द्वारा इस तरह गलत तरीके से गुपचुप ढंग से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है तो आखिर मीडिया से मुंह क्यों छुपा रहे हैं। और विभाग को को भी गुमराह क्यों कर रहे हैं। इसका माकूल जवाब शायद किसी के पास नहीं है।
◆ अध्यक्ष ने प्राचार्य को मीडिया के सामने चुप रहने दी थी हिदायत !
शिक्षकों की भर्ती के संबंध में गोधना स्कूल के प्रभारी प्राचार्य प्रदीप तिवारी ने मीडिया को बताया कि बेटे सहित आठ शिक्षकों की भर्ती हुई है...जिसमें समिति के नियमों का पालन किया गया है...नवनियुक्त शिक्षको का मासिक वेतनमान महज 1500 रूपये है मीडिया सज दूरी बनाने के संदर्भ में उन्होंने चुप्पी तोड़ते हुए खुलासा किया कि समिती अध्यक्ष द्वारा दबाव बनाते हुए उन्हें मीडिया के सामने चुप रहने सख्त हिदायत दी गई थी। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिरकार अध्यक्ष और प्राचार्य ने आपसी मिलीभगत से किस तरह नियम को दरकिनार कर शिक्षकों की भर्ती की है।

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