अवैध तरीके से समाचार पत्र प्रकाशन करने वाले भ्रष्ट अफसर पर बर्खास्तगी की हो कार्रवाई !

 अवैध तरीके से समाचार पत्र प्रकाशन करने वाले भ्रष्ट अफसर पर बर्खास्तगी की हो कार्रवाई !




◆ मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, समाचार पत्र पर उसके संपादक-प्रकाशक का विशेषाधिकार।

◆ दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की मांग को लेकर 10 सितंबर 2021 को एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन एवं 15 सितंबर 2021 से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन

मिशन क्रांंति न्यूज. जांजगीर-चाम्पा। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, किसी भी समाचार पत्र के प्रकाशन का संपूर्ण अधिकार उसके प्रकाशक, मुद्रक, स्वामी एवं संपादक का होता है लेकिन छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के एक अधिकारी ने लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ का मजाक बनाकर रख दिया है। जांजगीर चांपा से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को भी उन्होंने अवैध तरीके से छाप दिया, सूचना का अधिकार में उन्होंने अवैध रूप से छापे उस अखबार की कापी भी दे दी। उसी टेंडर में उनके द्वारा छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख अखबारों में से एक की प्रति भी लगाई गई है, उस समाचार पत्र का भी उनके द्वारा अवैध तरीके से प्रकाशन किए जाने की पूरी आशंका है। पूरे मामले के उजागर होने के बाद भी अधिकारी पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसके बाद महामहिम राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, जिले के प्रभारी मंत्री, संबंधित विभागीय मंत्री के नाम से कलेक्टर कार्यालय जांजगीर चांपा में ज्ञापन सौंपकर 10 सितंबर 2021 को एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन किए जान तथा फिर भी कार्यवाही नही होने पर 15 सितंबर 2021 से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किए जाने की घोषणा की गई है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजाक बनाने वाले श्री पीसी लहरे वही अधिकारी है जिनके बारे में पामगढ़ विधायक श्रीमती इंदू बंजारे ने दिसंबर 2020 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह सनसनीखेज आरोप लगाते हुए उन्हें जिले से हटाने की मांग की थी कि सहायक आयुक्त आदवासी विकास पीसी लहरे और उनके बाबू हर काम में पैसा लेते हैं। 

महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष एवं अन्य के नाम से भेजे ज्ञापन में उल्लेखित है कि आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग अंतर्गत संचालित विभागीय छात्रावास/आश्रम एवं आवासीय संस्थाओं के लिए वर्ष 2020-21 के लिए जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र तथा छात्रावास/ आश्रमों में लगने वाले आवश्यक पंजियों की छपाई आदिवासी विकास जांजगीर चांपा द्वारा कराई गई है। सूचना का अधिकार के तहत दी गई जानकारी में विभाग ने टेंडर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और एक अन्य समाचार पत्र में प्रकाशित होने की जानकारी दी जिसका जी नं. 86529 है, जनसंपर्क संचालनालय रायपुर में जी नं. 86529 आदिवासी विकास विभाग जांजगीर चांपा के विज्ञापन को देने की बात से स्पष्ट रूप से इंकार किया है, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस मे भी उक्त विज्ञापन प्रकाशित नहीं है, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जांजगीर चांपा ने स्वयं अवैध तरीके से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के उक्त पेज का प्रकाशन कर टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करा दी है। उनके द्वारा अन्य समाचार पत्रों की छपाई भी इसी तरह से टेंडर के लिए कराया गया है। शासन जनसंपर्क संचालनालय रायपुर से विभागों को प्रदत्त आईडी पासवर्ड से एक मिनट में इसका पता लगा सकती है, अवैध रूप से समाचार पत्र छपवाकर उसके आधार पर टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर उक्त अधिकारी ने शासन के साथ भी फर्जीवाड़ा करते हुए उसे लाखो रूपए की क्षति पंहुचाई है, अत: निवेदन है कि उक्त दोषी अधिकारी पर यथाशीघ्र कार्यवाही की जाए।

जाने,,,क्या है पूरा मामला

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग अंतर्गत संचालित विभागीय छात्रावास/आश्रम एवं आवासीय संस्थाओं के लिए वर्ष 2020-21 के लिए जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र तथा छात्रावास/ आश्रमों में लगने वाले आवश्यक पंजियों की छपाई आदिवासी विकास जांजगीर चांपा द्वारा कराई गई है। एक स्थानीय ठेकेदार ने जब उक्त टेंडर के संबंध में सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो उन्हें जानकारी देते हुए पीसी लहरे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जांजगीर चांपा ने एक प्रमुख अखबार के रायपुर संस्करण में 24 जनवरी 2021 को और दैनिक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में 25 जनवरी 2021 के अंक में उक्त टेंडर प्रकाशित होने की जानकारी देते हुए उन्हें समाचार पत्र की प्रतिलिपि भी सूचना का अधिकार के तहत प्रदान की। उक्त टेंडर में जी नं. (जनसंपर्क संचालनालय रायपुर द्वारा टेंडरों को जारी नं.) 86529 उल्लेखित है। मामले की जानकारी छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को होने पर जब छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ने अपने यहां के दस्तावेज, जनसंपर्क संचालनालय की साईट, और अपने 25 जनवरी 2021 के समाचार पत्र का निरीक्षण किया तो पता चला कि उस दिन छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में आदिवासी विकास जांजगीर चांपा का उक्त टेंडर छपा ही नहीं है। जी नं. 86529 के संबंध में जब डीपीआर (जनसंपर्क संचालनालय रायपुर) से जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि डीपीआर के द्वारा उक्त जी नं. रायपुर के एक विभाग के टेंडर को दिया गया है जो कि अन्य दूसरे समाचार पत्र में प्रकाशित है, डीपीआर ने आदिवासी विकास विभाग जांजगीर चांपा के टेंडर को उक्त जी नं. कभी दिया ही नहीं है। डीपीआर ने आदिवासी विकास जांजगीर चांपा को कभी उक्त जी नं. दिया नहीं, दैनिक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में उक्त टेंडर कभी छपा नहीं फिर आखिरकार उक्त जी नं. किसके द्वारा दिया गया, अवैध रूप से छापी गयी दैनिक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस की वह प्रति सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जांजगीर चांपा के पास कैसे पंहुची, और कैसे उक्त टेंडर के आधार पर 30 लाख रूपए की राशि का खेल हो गया यह बड़ा सवाल है। सहायक आयुक्त पीसी लहरे आदिवासी विकास जांजगीर चांपा के प्रमुख है, इसलिए सारी जिम्मेदारी भी उनकी ही है।

अफसर के खिलाफ शासन  कराए एफआईआर

सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का प्रकाशन तो अवैध रूप से किया है और भी कई समाचार पत्रों का प्रकाशन उनके द्वारा अवैध रूप से कराया गया हो सकता है, ऐसा कर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ उन्होंने खिलवाड़ किया है वहीं अवैध तरीके से अपने टेंडर में जी नंबर दर्ज कर, अवैध तरीके से प्रकाशित समाचार पत्र की प्रति के आधार पर संपूर्ण टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर बड़ा फर्जीवाड़ा किया है इसलिए एफआईआर शासन की ओर से दर्ज करायी जाए। अब तक सहायक आयुक्त पीसी लहरे जहां जहां भी पदस्थ रहे और उनके कार्यकाल में जितने भी टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण करायी गयी सबकी जांच की जाए वहीं जो भी टेंडर अवैध रूप से उनके द्वारा प्रकाशित समाचार पत्रों के आधार पर पूर्ण करायी गयी है उक्त सभी टेंडरों की संपूर्ण राशि की रिकवरी उनसे करते हुए उन संपूर्ण ठेकेदारों को ब्लेक लिस्टेड किया जाए जिनको श्री लहरे के माध्यम से अवैध रूप से फायदा पंहुचाया गया है। इसके अतिरिक्त पूरे मामले में जो भी अन्य लोग दोषी होंगे उन सभी पर कार्यवाही की जाए।


मुझे और मेरे परिवार को अधिकारी से  खतरा

पूरे मामले को उजागर करने और सहायक आयुक्त आदिवासी विकास पर कार्यवाही किए जाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस े के संपादक राजेश सिंह क्षत्री ने अपने विरूद्ध षडय़ंत्र रचे जाने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि अपनी सेवाकाल में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास के संबंध बहुत सारे उच्चाधिकारियों से बने होंगे, उन्होंने बहुत सारे साधन संपन्न लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ पंहुचाया होगा जिनके माध्यम से उनके समाचार पत्र, स्वयं उनके अथवा उनके परिवार के खिलाफ षडय़ंत्र रचा जा सकता है, ऐसा होने पर उसकी संपूर्ण जवाबदारी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जांजगीर चांपा पीसी लहरे की होगी, इस बाबत उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी एक पत्र भेजा है।

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